पण्डित लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी

जन्म : १६ मई १९०८

मृत्यु : २७ फ़रवरी १९७४

उनका जन्म १६ मई १९०८ में ग्राम सोनबरसा - तहसील सलेमपुर , ज़िला देवरिया [ तत्कलीन गोरखपुर ] के एक कृषक परिवार में हुआ था।

उन्होंने १९२२ में किंग एडवर्ड हाई स्कूल देवरिया [ वर्तमान राजकीय इण्टर कॉलेज, देवरिया ] से हाई स्कूल प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया था।

उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल, अतीत की जकड़न में लगभग निष्पंद पूर्वांचल, अपने महिमा मंडन के लिए उधार के महापुरुषों की खोज में निरंतर प्रयासरत पूर्वांचल सदा सर्वदा कुछ कुछ नामों पर आकर ठहर जाता है। देवरहा बाबा पूर्वांचल के शीर्ष पुरुष हैं। शायर फ़िराक़ गोरखपुरी और चित्रकार अमृता शेरगिल, समाज सेवी बाबा राघव दास तथा पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर कुछ अन्य नाम हैं जिनके ऊपर पूर्वांचल का कुंठित समाज गर्व का अनुभव कर लेता है। अगर पूरे पूर्वांचल की यह स्थिति है तब देवरिया जनपद की क्या स्थिति होगी इसकी कल्पना की जा सकती है।

श्री. लक्ष्मीकांत चतुर्वेदी का

अध्यक्षीय भाषण

भारतीय जन संघ, उत्तर प्रदेश

प्रादेशिक अधिवेशन, बरेली
मार्गशीर्ष शुक्ल १३, १४ वि. सं. २०१६
१२ तथा १३ दिसंबर सन १९५९ ई.
१- बरेली नगर में होने वाले प्रादेशिक सम्मेलन में मैं आप सभी लोगों का स्वागत करता हूं। आपने आगामी वर्ष के लिए भी पुनः प्रादेशिक प्रधान चुनकर मेरे प्रति जो विश्वास प्रकट किया है उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जो स्वतंत्रता के बाद भारतीय इतिहास का एक अत्यंत तनावपूर्ण समय है। साम्यवादी लाल चीन ने अपनी साम्राज्य विस्तार की लिप्सा को पूर्ण करने के लिए भारत वर्ष को ही अबकी अपना लक्ष्य बनाया है और भारत के उत्तर-पूर्व, उत्तर तथा कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में आक्रमण कर दिया है। ऐसे समय में अमरीकी राष्ट्रपति का शान्ति के अग्रदूत के रूप में हमारे देश में आना एक शुभ लक्षण है। हम उनका स्वागत करते हैं।

२- एक पड़ोसी मित्र राष्ट्र द्वारा भारत पर आक्रमण इस युग की अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण दुर्घटना है। भारतीय जनसंघ ने १९५७ में तिब्बत को लाल चीन द्वारा उदरस्थ किए जाने के बाद अपने चुनाव घोषणा पत्र में यह आशंका व्यक्त की थी कि लाल चीन के इरादे भारत के प्रति अच्छे नहीं हैं और लाल चीन भारत पर आक्रमण कर सकता है किन्तु उस समय हमारे शासक वर्ग ने जनसंघ की इस चेतावनी के प्रति ध्यान नहीं दिया। जनसंघ की राजनैतिक भविष्यवाणी आज सत्य सिद्ध हुई है।

३- इस चीनी आक्रमण के लिए भी हमारे शासक गण और मुख्यतः हमारे प्रधानमंत्री उत्तर दायी हैं। किन्हीं दो बड़े देशों के मध्य तिब्बत जैसा एक buffer राष्ट्र का होना आवश्यक है और ईश्वर की कृपा से चीन और भारत के बीच एक ऐसा buffer राष्ट्र – तिब्बत मौजूद भी था। किन्तु तिब्बत के विषय में हमारे प्रधानमंत्री ने जिस राजनैतिक अदूरदर्शिता, अज्ञानता, अनुभवहीनता का परिचय दिया है वह किसी भी शासक के लिए क्षम्य नहीं हो सकता। चीन द्वारा तिब्बत को उदरस्थ करने का विरोध न करके हमारे शासकों ने केवल मानवता की हत्या नहीं की है किन्तु भारत की सुरक्षा को भी सदैव के लिए ख़तरे में डाल दिया है।

संस्मरण

संस्मरण – १

बहुत याद आते हैं लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी जी

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लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी जी आध्यात्मिक इंसान थे। मानवतावादी थे। देशभक्त मज़लूमों की तकलीफ़ों को देख नहीं पाते थे। न्यायालय में उनके यह गुण दिखाई पड़ते थे। उनकी जिरह और बहस सुनते हुए अधिवक्ता गम्भीर हो जाते थे। चतुर्वेदी जी दीवानी और फ़ौजदारी के मामलों के माहिर वकील और जाने-माने राजनीतिक व्यक्ति रहे। जीवन पर्यन्त आर एस एस और जनसंघ के सच्चे सेवक रहे।

लक्ष्मीकान्त चतुर्वेदी प्रज्ञा सम्मान

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श्री श्रीचंद गोरे
[ पत्रकारिता व अध्यापन ]

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